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सऊदी अरब में हुआ अमेरिकी धमकी का असर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सऊदी अरब को लेकर एक बड़ा बयान दिया था उन्होंने कहा था कि सऊदी अरब के शाह अपने पद पर दो सप्ताह भी अमेरिकी सैन्य सहयोग के बिना नहीं रह सकते है ।
अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान से सऊदी अरब पर कच्चे तेल को लेकर और भी दबाव बढ़ गया । डोनाल्ड ट्रंप ने तेल की बढ़ती कीमतों को ध्यान में रखकर पश्चिम एशिया में अमेरिका की सबसे बड़े और करीबी सहयोगी सऊदी अरब को कच्चे तेल के उत्पाद को बढ़ाने के लिए कहा था  गौरतलब है कि कच्चे तेल की कीमतें अपने  सर्वोच्च स्तर पर पहुंच रही थी । जिसके बाद का के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक और सऊदी से बार बार इन दामों को कम करने का आदेश दिया था ।
डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद तेल उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए अमेरिका द्वारा सऊदी अरब पर की गई  बयानबाज़ी का असर होता हुआ दिख रहा है । गौरतलब है कि सऊदी अरब जो कि दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है। वह भारत को नवंबर में 4000000 बैरल ज्यादा तेल सप्लाई  करेगा ।
दूसरी तरफ भारत ईरान का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीददार है ।  ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध 4 नवंबर से लागू होने वाले हैं। भारत के कई रिफाईनरीज कंपनियों ने संकेत दिया है कि अमेरिकी प्रतिबंध ईरान पर लग जाने के कारण ईरान से तेल आयात नहीं हो पाएगा। इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ,  हिंदुस्तान पैट्रोलियम कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और मैंगलोर रिफाइनरी पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड जैसी कंपनियां नवंबर में 1000000 बैरल तेल सऊदी से मांग कर रही हैं।
गौरतलब है कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। भारतीय रुपए में गिरावट , दुनिया में तेल की बढ़ती कीमतें और तेल के दाम का भुगतान डॉलर में होने से भारत को तेल आयात करने में काफी महंगा पड़ रहा है । इस विषय में भारत के पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी कहा कि सऊदी अरब के उर्जा मंत्री खालिद अल फलह से बात की है और उन्हें ओपेक देशों द्वारा तेल के उत्पादन में वृद्धि का वादा याद दिलाया । भारत गौरतलब है कि भारत सऊदी से हर महीने तकरीबन ढाई करोड़ बैरल तेल का आयात करता है  ।

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